ये उन दिनों की बात है जब हमारी लाइफ में कोरोना ने एंट्री ली …….

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साल २०19 में एक ऐसे वायरस ने दुनिया में दस्तक दी जिसने देश ही नहीं पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया। जी हा मै बात कर रही हु चीन के वूहान से निकले covid 19 यानि की कोरोना वायरस की। 2019 के नवंबर से पनपे कोरोना ने पूरी दुनिया में मानो तबाही मचा दी हो। खैर किसने सोचा था की की विदेशी वायरस हमारे देश में भी आएगा ,हम भारतीय नए साल 2020 का भव्य स्वागत किया और अपने अपने रेसोलुशन सोचने लगे और अपनी तरक्की की कामना करने लगे आखिर किसने सोचा था की हमारा सारा प्लान धरा का धरा रह जाएगा।

धीरे धीरे जनवरी का भी महीना भी जाने लगा और हमें कोरोना की खबर मिलने लगी तब भी हमें कोरोना का पता नहि था की इस क़दर हमारी ज़िन्दगी को बदल कर रख देगा। बहर हाल धीरे धीरे हमारा देश भी कोरोना की चपेट में बुरी तरह आ गया और तक़रीबन एक दिन में 1000 से ज़्यादा कोरोना क मरीज़ हर राज्य से मिलने लगे। जिसको देखते हुए माननीय प्रधान मंत्री जी ने पूरे देश में 21 का लॉक डाउन घोषित कर दिया। मोदी जी ने लॉक डाउन तो हमें कोरोना से बचाने के लिए कर दिया पर क्या उन्होंने हम जैसे माधयम वर्गीय लोगो के बारे में सोचा था ? या फिर उन गरीब मजदूरों के बारे में जो किसी दसूरे शहर में जाकर अपना पेट पाल रहे थे ?

खैर अब तो लॉक डाउन लग गया अब तो उन मजदूरों को अपना पेट भी पालना है और अपने गावं भी लौटना था, और हम जैसे माध्यम वर्गीय को अपना घर चलाना था ,न नौकरी ,न दुकान और न ही कोई सोर्स ऑफ़ इनकम जो सेविंग बचा कर रखी थी उसी को आज निकाल कर खाने की नौबत आ गयी। लेकिन हमारा तो जैसे तैसे चल ही रहा था लेकिन ज़रा उन गरीब मज़दूरों का सोच कर दिल आज भी देहलता है जब हर सुबह उन पैदल चल रहे प्रवासी मजदूरों की मार्मिक तस्वीर या वीडियो आती थी। जिसमे या तो खाने क बिना रो रहे या मीलो पैदल चलने का सफर हो, कितने मजदूरों ने तो चलते चलते हार मान ली और घर जाने की चाह लिए मौत को गले लगा लिए।

बावजूद इसके सर्कार की तरफ से कोई भी सुविधा इन कामगारों ,प्रवासी मजदूरों को नहीं मिली और इन्होने अपने घर तक का सफर खुद की महनत से ही पार किया सिर्फ इसी उम्मीद में ही की ये लॉक डाउन खंत्म होगा और हमारा कारोबार हमारा कामकाज फिर से चलेगा। इसी आस में हम भी थे की कोरोना के केसेस तो वैसे भी बढ़ रहे फिर ये न खत्म होने वाला लॉक डाउन कब तक ? क्युकि हर कोई 21 दिन का लॉक डाउन खत्म होने का इंतज़ार में थे ,लेकिन हमारे मोदी जी आते और मन की बात में सिर्फ यही कह क जाते की सय्यम रखे और घर पर रहे। और ऐसे ही करते करते ३ महीने का लम्बा समय गुज़र गया और हम सामने हार मान ली। इन ३ महीनो में हमने बहुत से लोगो को खो दिया जिसमे दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर , इरफ़ान खान , सुशांत सिंह राजपूत और भी बहुत से आम और खास लोगो की जान गयी।

लेकिन वो कहते हैना चाहे कितनी ही काली अँधेरी रात हो अपने साथ सुबह लेकर ही आती है ठीक ऐसा ऐसा ही हमारे साथ हुआ जब 3 ,महीने के बाद धीरे धीरे हमारी ज़िन्दगी की गाड़ी फिर से पटरी पर चलने को तैयार थी। सरकारी गाड़िया जैसे बस, रिक्शा ,टैम्पो वगैरह चलने लगा क्लिनिक ,कपड़े की दुकान और रेस्टुरेंट कोविद 19 के नियमो का पालन करने का निर्देश आखिरकार मोदी जी ने दिया जिससे की देश की अर्थव्यवस्था दुरुस्त हो। इसके बाद चरण बद्ध तरीके से हर चीज़ खुलने लगी चाहे वो पटरी मार्किट हो या सैलून या फिर शॉपिंग मॉल।

लेकिन एक चीज़ थी जिसने जबसे ज़्यादा वक़्त लिया दुबारा से शुरू होने में। वो क्या है जानने के लिए हमारे वेबसाइट पे बने रहिये।

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